
नालंदा जिला परिषद की अध्यक्ष तनुजा देवी की कुर्सी छीन गई है। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया है। शुक्रवार को तनुजा देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विशेष बैठक बुलाई गई । जिसमें पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई । उसके बाद इसपर वोटिंग हुई। जिसमें वो बुरी तरह से हार गईं। जिला परिषद की विशेष बैठक में 34 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने ही हिस्सा लिया। जिसमें से 19 लोगों ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया। यानि तनुजा देवी के खिलाफ 20 में से 19 सदस्यों ने वोटिंग की और उनकी कुर्सी चली गई।

तनुजा देवी का विवादों से रहा है नाता
तनुजा देवी करीब दो साल तक नालंदा जिला परिषद की अध्यक्ष रहीं। वो 30 जून 2016 को जिला परिषद अध्यक्ष बनीं थीं। इस दौरान वो कई बार विवादों में भी रहीं। उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था। निवर्तमान डीडीसी कुंदन कुमार पर भी कई आरोप लगाई थीं। जिला प्रशासन के खिलाफ एकंगरसराय से बिहारशरीफ पैदल मार्च की थीं ।

अपनों ने ही खोला था मोर्चा
जिला परिषद अध्यक्ष तनुजा देवी के खिलाफ उनके अपने ही सदस्यों ने मोर्चा खोलते हुए अविस्ताव प्रस्ताव लाया था। जिसमें सरमेरा के नरोत्तम कुमार, अस्थावां के सीताराम सिंह, अस्थावां के बालमुकुंद, हरनौत के कमलेश पासवान के अलावा अनुरुद्ध कुमार, पार्वती देवी और पुरुषोतम जैन शामिल थे।
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अब आगे क्या होगा
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद डीडीसी राकेश कुमार ने निर्वाचन आयोग को प्रोसीडिंग भेज दी है। कुछ दिन बाद चुनाव का समय निर्धारित किया जाएगा। जिसके बाद नए जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव होगा। आपको बता दें पांच साल में जिला परिषद अध्यक्ष पर एक बार ही अविस्ताव प्रस्ताव लाया जा सकता। इसमें भी शर्त यह है कि दो वर्ष तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।