
नालंदा की धरती आज एक बार फिर धन्य हो उठी है। नालंदा की बेटी श्वेता शाही को लंदन में रग्बी का सबसे बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है । उन्हें ग्लोबल वूमेन ऑफ रग्बी अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। ये सम्मान पाने वाली श्वेता शाही पहली भारतीय महिला बनीं हैं। इस सम्मान के लिए पूरी दुनिया से 15 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। जिसमें भारत से एकमात्र श्वेता शाही का चयन हुआ है।
श्वेता शाही के बारे में जानिए
श्वेता शाही नालंदा जिला के सिलाव प्रखंड के एक छोटे से गांव भदारी की रहने वाली हैं। श्वेता का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ है । श्वेता शाही के पिता का नाम सुजीत कुमार शाही है। जबकि माता जी का नाम चंपा देवी है। जो गृहलक्ष्मी हैं। श्वेता तीन भाई और दो बहन हैं। नालंदा के एक छोटे गांव में पैदा हुई श्वेता ने वो कारनाम कर दिखाया है। जो बड़े बड़े शहरों में भी पैदा होकर नहीं कर पाते हैं। लेकिन श्वेता सिर्फ गांव में ही पैदा नहीं हुई बल्कि गांव में रहकर ही बिना किसी ट्रेनिंग या कोचिंग के वो मुकाम हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं हैं। श्वेता ने गांव में ही रहकर विदेशी खेल जिसे रग्बी कहते हैं सीखा है ।
‘गांववाले मजाक उड़ाते थे’
श्वेता शाही का दूर दूर तक रग्बी का वास्ता नहीं था। न कोई घर में, न परिवार में और न गांव या जिला में कोई रग्बी खेलता था। लेकिन श्वेता को फुटबॉल खेलना पंसद था। वो गांव खाली पड़ी जमीन में खेलती रहती थीं। श्वेता कहती हैं कि जब वो छोटे कपड़े पहनकर खेलती थीं तो गांव वाले बहुत मजाक उड़ाते थे। गांव की महिलाएं कहती थीं कि देखो अब इतना छोटा कपड़ा पहनकर मर्दों वाला खेल खेल रही है। महिलाएं शादी विवाह को लेकर भी ताना मारती थीं।
मामा को पंसद नहीं था रग्बी
श्वेता कहतीं है कि उनके मामा को भी ये खेल पसंद नहीं है। क्योंकि रग्बी में चोट की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में मामा भी कहते थे कि इस सब मत खेलो कौन शादी करेगा तुमसे।क्योंकि श्वेता के उम्र की अधिकतर लड़कियों की शादी हो गई है। लेकिन श्वेता शाही के साथ उसके पापा चट्टान की भांति खड़े रहे। सुजीत कुमार शाही कहते कि उनकी बेटी को जो मन है वही करेगी। फिर क्या था श्वेता सबके ताने को नजरअंदाज कर अपना खेल खेलती रही।
मगही बोलने पर उड़ाते हैं मजाक
श्वेता कहती हैं कि वो गांव में ही रहीं। जिस वजह से वो मगही बोलती हैं। बाकी खिलाड़ियों की तरह खड़ी हिंदी नहीं बोलती हैं। जिस वजह से नेशनल टीम की खिलाड़ी उनका मजाक भी उड़ाती हैं। झिझक की वजह से श्वेता ने स्पोकन इंग्लिश का कोर्स भी किया। जिससे इंग्लिश की समझ तो विकसित हो गई । लेकिन इंग्लिश नहीं बोल पाती हैं। हालांकि वो गर्व से कहती हैं कि हां मैं मगही हूं। अगर तुम्हें समझ में आती है तो ठीक नहीं तो हमारा क्या। हम तो मगही ही बोलेंगे।
YouTube से सीखी रग्बी
श्वेता का कहना है कि वो एक बार राज्य ओलंपिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई थीं। वहां पहली बार वो रग्बी का नाम सुनी थी। बिहार रग्बी संघ के सचिव ने श्वेता शाही से पहली बार रग्बी का जिक्र किया और रग्बी खेलने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद श्वेता ने रग्बी के बारे में सोचा। वो घर आकर अपने पापा सुजीत कुमार शाही को रग्बी के बारे में बतायी।लेकिन पापा का तो खेल से दूर-दूर तक नाता नहीं था। ऐसे में श्वेता ने अपने पापा के मोबाइल का इस्तेमाल किया और यू-ट्यूब पर रग्बी का खेल और सीखा। श्वेता ने यू ट्यूब को ही अपना कोच या गुरु माना। जिससे वो इस मुकाम तक पहुंच पाई।
न मैदान,न कोच, फिर भी भरी उड़ान
श्वेता शाही ने बिना मैदान और कोच के ही ये उपलब्धि हासिल की है। उनके पिता ही उनके प्रशिक्षक हैं। श्वेता साल 2013 में रग्बी खेलना शुरू किया। तब से कई अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं । एशियन अंडर 18 फुटबॉल चैम्पियनशिप में पदक हासिल किया
श्वेता की अबतक की उपलब्धियां
बिहार स्टेट स्पोर्ट्स अवॉर्ड नेशनल कटेगरी 2014
बिहार स्टेट स्पोर्ट्स अवॉर्ड इंटरनेशनल कटेगरी 2015
बिहार स्टेट स्पोर्ट्स अवॉर्ड इंटरनेशनल कटेगरी 2016
किन किन गेम्स में हिस्सा ले चुकी हैं
ऑल इंडिया जूनियर नेशनल रग्बी चैम्पियनशिप 2014
60वां नेशनल गेम्स 2014
ऑल इंडिया सीनियर नेशनल रग्बी चैम्पियनशिप 2015
सीनियर नेशनल रग्बी 2016
जूनियर नेशनल रग्बी चैम्पियनशिप 2016
62वां नेशनल गेम 2016
फेडरेशन कप रग्बी चैम्पियनशिप 2017
सीनियर नेशनल रग्बी चैम्पियनशिप 2018
एशियन वुमेंस रग्बी चैम्पियनशिप चेन्नई 2015
एशियन वुमेंस चैम्पियनशिप श्रीलंका 2018
अंडर 18 एशियन गर्ल्स रग्बी चैम्पियनशिप दुबई 2018
क्या है श्वेता की इच्छा
श्वेता शाही कहतीं है कि गांव में जिस जमीन पर वो प्रैक्टिस करती थीं उस जमीन पर बाउंड्री वाल बना दिया गया है। जिस वजह से अब उन्हें प्रैक्टिस करने के लिए छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। खास बात ये है कि श्वेता अपने साथ आसपास के लड़के लड़कियों को ट्रेनिंग भी दे रही है । उनकी वजह से 6 लड़कियां नेशनल भी खेल चुकी हैं। ऐसे में श्वेता की इच्छा है कि जिले में एक स्टेडियम हो। ताकि वो लोगों को ट्रेंड कराकर जिले और देश का नाम रोशन कर सके
श्वेता पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री
श्वेता को लंदन में ग्लोबल वूमेन ऑफ रग्बी अवार्ड मिलेगा । ये सम्मान महिलाओं के बीच रग्बी फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए यह सम्मान मिल रहा है। उनके पिता सुजीत कुमार शाही श्वेता की इस उपलब्धि पर काफी खुश हैं और कहते हैं कि यह सम्मान पूरे देश की बेटियों के लिए है। श्वेता पर वर्ल्ड रग्बी द्वारा डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनायी जायेगी। ताकि पूरी दुनिया में इसे दिखाकर लड़कियों को रग्बी खेल के लिए प्रेरित किया जा सके।
नालंदा लाइव भी जिलावासियों की तरफ से श्वेता शाही को उनकी उपलब्धियों पर ढेर सारी बधाई देता है। और उनकी मेहनत को सलाम करता है ।